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mahabharat 6.43.9-10: नरेश्वर! उस समय देवता, गन्धर्व, पितर, सिद्ध, चारण और महाभाग महर्षि एक साथ वहाँ आये, जिससे देवराज इन्द्र को वह भीषण संहार देखने को मिला॥9-10॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  6.43.9-10 
तथा देवा: सगन्धर्वा: पितरश्च जनाधिप।
सिद्धचारणसंघाश्च समीयुस्ते दिदृक्षया॥ ९॥
ऋषयश्च महाभागा: पुरस्कृत्य शतक्रतुम्।
समीयुस्तत्र सहिता द्रष्टुं तद् वैशसं महत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! उस समय देवता, गन्धर्व, पितर, सिद्ध, चारण और महाभाग महर्षि एक साथ वहाँ आये, जिससे देवराज इन्द्र को वह भीषण संहार देखने को मिला॥9-10॥
 
Nareshwar! At that time, the gods, Gandharvas, ancestors, Siddhas, Charanas and Mahabhaga Maharishis came there together, leading Devraj Indra to see that gruesome slaughter. 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)