श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  6.43.88 
संजय उवाच
अनुमान्याथ कौन्तेयो मातुलं मद्रकेश्वरम्।
निर्जगाम महासैन्याद् भ्रातृभि: परिवारित:॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! इस प्रकार अपने मामा मद्रराज शल्य से अनुमति लेकर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर अपने भाइयों से घिरे हुए उस विशाल सेना से बाहर चले गये।
 
Sanjaya says: O King! Thus, taking permission from his maternal uncle, Madra king Shalya, Yudhishthira, son of Kunti, surrounded by his brothers, went out of that huge army. 88.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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