श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  6.43.87 
शल्य उवाच
सम्पत्स्यत्येष ते काम: कुन्तीपुत्र यथेप्सितम्।
गच्छ युध्यस्व विश्रब्ध: प्रतिजाने वचस्तव॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
शल्य बोले- हे कुन्तीपुत्र! तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी। जाओ, निश्चिंत होकर युद्ध करो। मैं तुम्हारे वचन का पालन करने का वचन देता हूँ।
 
Shalya said— O son of Kunti! Your desired wish will surely be fulfilled. Go, fight without any worry. I promise to keep your word.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd