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mahabharat 6.43.85: शल्य बोले, "हे राजनश्रेष्ठ! आप मुझे बताइए कि मैं इस मामले में आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ? मैं कौरवों से प्राप्त धन से बंधा हुआ हूँ; अतः अपनी इच्छानुसार मैं आपके विरोधियों के पक्ष में युद्ध करूँगा।"   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  6.43.85 
शल्य उवाच
किमत्र ब्रूहि साह्यं ते करोमि नृपसत्तम।
कामं योत्स्ये परस्यार्थे बद्धोऽस्म्यर्थेन कौरवै:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
शल्य बोले, "हे राजनश्रेष्ठ! आप मुझे बताइए कि मैं इस मामले में आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ? मैं कौरवों से प्राप्त धन से बंधा हुआ हूँ; अतः अपनी इच्छानुसार मैं आपके विरोधियों के पक्ष में युद्ध करूँगा।"
 
Shalya said, "Tell me, O best of kings, how can I help you in this matter? I am bound by wealth from the Kauravas; therefore, according to my wish, I will fight on the side of your opponents." 85
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)