श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  6.43.84 
युधिष्ठिर उवाच
मन्त्रयस्व महाराज नित्यं मद्धितमुत्तमम्।
कामं युद्धॺ परस्यार्थे वरमेतं वृणोम्यहम्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे राजन! मैं आपसे यह वर माँगता हूँ कि आप प्रतिदिन मेरे कल्याण के लिए मुझे उपदेश देते रहें। अपनी इच्छानुसार दूसरों के लिए युद्ध करें।" 84
 
Yudhishthira said, "O King! I ask you for this boon that you keep giving me advice for my welfare every day. Fight the war for others as per your wish." 84
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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