श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.43.8 
ततो भेर्यश्च पेश्यश्च क्रकचा गोविषाणिका:।
सहसैवाभ्यहन्यन्त तत: शब्दो महानभूत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वहाँ भेरी, पेशी, क्रकच और नरसिंह आदि वाद्य अचानक बजने लगे, जिससे वहाँ महाशब्द गूंजने लगा ॥8॥
 
Thereafter musical instruments like Bheri, Peshi, Krakach and Narsimha etc. suddenly started playing. Due to this the great word started echoing there. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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