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mahabharat 6.43.78: ‘दुर्धर्ष वीर! मैं पापरहित और दोषरहित होकर आपके साथ युद्ध करूँगा; इसके लिए आपकी अनुमति चाहता हूँ। हे राजन्! आपकी अनुमति से मैं युद्ध में समस्त शत्रुओं को परास्त कर सकता हूँ।’॥78॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  6.43.78 
अनुमानये त्वां दुर्धर्ष योत्स्ये विगतकल्मष:।
जयेयं नु परान् राजन्ननुज्ञातस्त्वया रिपून्॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
‘दुर्धर्ष वीर! मैं पापरहित और दोषरहित होकर आपके साथ युद्ध करूँगा; इसके लिए आपकी अनुमति चाहता हूँ। हे राजन्! आपकी अनुमति से मैं युद्ध में समस्त शत्रुओं को परास्त कर सकता हूँ।’॥78॥
 
‘Durdharsh Veer! I will fight with you without any sins and without any faults; I want your permission for this. O King! With your permission, I can defeat all the enemies in the war.’॥ 78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)