श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  6.43.76 
एतच्छ्रुत्वा महाराज गौतमस्य विशाम्पते।
अनुमान्य कृपं राजा प्रययौ येन मद्रराट्॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! प्रजानाथ! कृपाचार्य के ये वचन सुनकर राजा युधिष्ठिर उनकी अनुमति लेकर वहाँ गये, जहाँ मद्रराज शल्य थे।
 
Maharaj! Prajanath! On hearing these words of Krupacharya, King Yudhishthira took his permission and went to the place where Madraraj Shalya was.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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