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mahabharat 6.43.74: संजय कहते हैं - हे पृथ्वीपति ! कृपाचार्य युधिष्ठिर की बात समझ गए; अतः उन्होंने उनसे इस प्रकार कहा - 'हे राजन ! मैं अजेय हूँ। जाओ, युद्ध करो और विजय प्राप्त करो ॥ 74॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  6.43.74 
संजय उवाच
तं गौतम: प्रत्युवाच विज्ञायास्य विवक्षितम्।
अवध्योऽहं महीपाल युद्धॺस्व जयमाप्नुहि॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे पृथ्वीपति ! कृपाचार्य युधिष्ठिर की बात समझ गए; अतः उन्होंने उनसे इस प्रकार कहा - 'हे राजन ! मैं अजेय हूँ। जाओ, युद्ध करो और विजय प्राप्त करो ॥ 74॥
 
Sanjaya says - O lord of the earth! Krupacharya understood what Yudhishthira wanted to say; therefore he said to him in this way - 'O king! I am invincible. Go, fight and achieve victory'॥ 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)