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mahabharat 6.43.72: महाराज! मैंने निश्चय कर लिया है कि मुझे उनके लिए युद्ध करना है; इसलिए मैं नपुंसक की भाँति आपसे पूछ रहा हूँ कि युद्ध में सहायता के अतिरिक्त आप मुझसे और क्या चाहते हैं?॥ 72॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  6.43.72 
तेषामर्थे महाराज योद्धव्यमिति मे मति:।
अतस्त्वां क्लीबवद् ब्रूयां युद्धादन्यत् किमिच्छसि॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मैंने निश्चय कर लिया है कि मुझे उनके लिए युद्ध करना है; इसलिए मैं नपुंसक की भाँति आपसे पूछ रहा हूँ कि युद्ध में सहायता के अतिरिक्त आप मुझसे और क्या चाहते हैं?॥ 72॥
 
Maharaj! I have decided that I have to fight for them; therefore I am asking you like an impotent person that what else do you want from me apart from help in the war?॥ 72॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)