श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  6.43.70 
कृप उवाच
यदि मां नाभिगच्छेथा युद्धाय कृतनिश्चय:।
शपेयं त्वां महाराज पराभावाय सर्वश:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
कृपाचार्य बोले - महाराज! यदि आप युद्ध करने का निश्चय करके मेरे पास न आते तो मैं आपको शाप दे देता कि तुम पूर्णतः पराजित हो जाओ।
 
Kripacharya said - Maharaj! If you had not come to me after deciding to fight, I would have cursed you to be completely defeated. 70.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd