श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  6.43.69 
अनुमानये त्वां योत्स्येऽहं गुरो विगतकल्मष:।
जयेयं च रिपून् सर्वाननुज्ञातस्त्वयानघ॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
पापरहित गुरुदेव! मैं आपकी अनुमति चाहता हूँ ताकि मैं पापरहित रहकर आपके साथ युद्ध कर सकूँ। आपकी अनुमति से मैं युद्ध में अपने समस्त शत्रुओं को परास्त कर सकूँ।'॥69॥
 
‘Sinless Gurudev! I want your permission so that I can fight with you while remaining sinless. With your permission, I can defeat all my enemies in the battle.'॥ 69॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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