Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.43.64: द्रोणाचार्य बोले - हे भाई! जब मैं अपने रथ पर बैठकर, क्रोधित होकर, बाणों की वर्षा करते हुए युद्ध में तत्पर रहता हूँ, उस समय मुझे कोई ऐसा शत्रु नहीं दिखाई देता जो मुझे मार सके। | mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रोण उवाच
न शत्रुं तात पश्यामि यो मां हन्याद् रथे स्थितम्।
युध्यमानं सुसंरब्धं शरवर्षौघवर्षिणम्॥ ६४॥
अनुवाद
द्रोणाचार्य बोले - हे भाई! जब मैं अपने रथ पर बैठकर, क्रोधित होकर, बाणों की वर्षा करते हुए युद्ध में तत्पर रहता हूँ, उस समय मुझे कोई ऐसा शत्रु नहीं दिखाई देता जो मुझे मार सके।
Dronacharya said - Dear brother! When I am seated on my chariot, enraged and engaged in battle, showering arrows, at that time I do not see any enemy who can kill me. 64.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥