श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  6.43.63 
युधिष्ठिर उवाच
हन्त तस्मान्महाबाहो वधोपायं वदात्मन:।
आचार्य प्रणिपत्यैष पृच्छामि त्वां नमोऽस्तु ते॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे महाबाहु गुरुवर! अतः अब आप कृपा करके मुझे आत्म-संहार का उपाय बताइए। मैं आपको प्रणाम करता हूँ। आपके चरणों में प्रणाम करके मैं यह प्रश्न पूछ रहा हूँ।
 
Yudhishthira said - O great-armed teacher! Therefore, now please tell me the way to kill yourself. I salute you. I am asking this question after bowing at your feet.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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