श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  6.43.62 
द्रोण उवाच
न तेऽस्ति विजयस्तावद् यावद् युद्धॺाम्यहं रणे।
ममाशु निधने राजन् यतस्व सह सोदरै:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य बोले, "हे राजन! जब तक मैं युद्धभूमि में लड़ता रहूँगा, तब तक तुम विजयी नहीं हो सकते। तुम्हें और तुम्हारे भाइयों को ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि मैं शीघ्र ही मर जाऊँ।" 62
 
Dronacharya said, "O King! As long as I fight in the battlefield, you cannot be victorious. You and your brothers should make such efforts that I die soon." 62
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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