श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  6.43.61 
युधिष्ठिर उवाच
पृच्छामि त्वां द्विजश्रेष्ठ शृणु यन्मेऽभिकाङ्क्षितम्।
कथं जयेयं संग्रामे भवन्तमपराजितम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं आपसे पूछ रहा हूँ। कृपया मेरा इच्छित प्रश्न सुनिए। आप तो किसी से पराजित होने वाले नहीं हैं; फिर मैं आपको युद्ध में कैसे हरा पाऊँगा?"
 
Yudhishthira said, "O great Brahmin, I am asking you. Please listen to my desired question. You are not going to be defeated by anyone; then how will I be able to defeat you in battle?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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