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mahabharat 6.43.53: द्रोणाचार्य बोले - महाराज! यदि आप युद्ध करने का निश्चय करके मेरे पास न आते तो मैं आपको शाप दे देता कि तुम पूर्णतः पराजित हो जाओ।   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.43.53 
द्रोण उवाच
यदि मां नाभिगच्छेथा युद्धाय कृतनिश्चय:।
शपेयं त्वां महाराज पराभावाय सर्वश:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य बोले - महाराज! यदि आप युद्ध करने का निश्चय करके मेरे पास न आते तो मैं आपको शाप दे देता कि तुम पूर्णतः पराजित हो जाओ।
 
Dronacharya said - Maharaj! If you had not come to me after deciding to fight, I would have cursed you to be completely defeated. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)