Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.43.49-51: संजय ने कहा - कुरुपुत्र! तत्पश्चात महाबाहु युधिष्ठिर ने भीष्म की आज्ञा स्वीकार की और उन्हें पुनः प्रणाम करके द्रोणाचार्य के रथ की ओर चल पड़े। सारी सेना देख रही थी और वे उसमें से होते हुए अपने भाइयों सहित द्रोणाचार्य के पास पहुँचे। वहाँ राजा ने उन्हें प्रणाम किया, उनकी परिक्रमा की और उन अजेय योद्धा से उनका कुशलक्षेम पूछा। | mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संजय ने कहा - कुरुपुत्र! तत्पश्चात महाबाहु युधिष्ठिर ने भीष्म की आज्ञा स्वीकार की और उन्हें पुनः प्रणाम करके द्रोणाचार्य के रथ की ओर चल पड़े। सारी सेना देख रही थी और वे उसमें से होते हुए अपने भाइयों सहित द्रोणाचार्य के पास पहुँचे। वहाँ राजा ने उन्हें प्रणाम किया, उनकी परिक्रमा की और उन अजेय योद्धा से उनका कुशलक्षेम पूछा।
Sanjaya said - Son of Kuru! Thereafter the mighty-armed Yudhishthira accepted Bhishma's command and after bowing to him again he went towards Dronacharya's chariot. The entire army was watching and he passed through it and reached Dronacharya along with his brothers. There the king bowed to him and circumambulated him and asked that unconquerable warrior about his welfare.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥