Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.43.46: भीष्म बोले - हे कुन्तीपुत्र! मुझे ऐसा कोई वीर पुरुष नहीं दिखाई देता जो युद्धभूमि में लड़ते हुए मुझे परास्त कर सके। कोई भी मनुष्य, यहाँ तक कि स्वयं इन्द्र भी, मुझे युद्ध में परास्त नहीं कर सकता।   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  6.43.46 
भीष्म उवाच
नैनं पश्यामि कौन्तेय यो मां युध्यन्तमाहवे।
विजयेत पुमान् कश्चित् साक्षादपि शतक्रतु:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - हे कुन्तीपुत्र! मुझे ऐसा कोई वीर पुरुष नहीं दिखाई देता जो युद्धभूमि में लड़ते हुए मुझे परास्त कर सके। कोई भी मनुष्य, यहाँ तक कि स्वयं इन्द्र भी, मुझे युद्ध में परास्त नहीं कर सकता।
 
Bhishma said - O son of Kunti! I do not see any such brave man who can defeat me while fighting in the battlefield. No man, even Indra himself, can defeat me during the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)