Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.43.45: युधिष्ठिर बोले, "पितामह! आप तो किसी से पराजित होने वाले नहीं हैं, फिर मैं आपको युद्ध में कैसे हरा सकता हूँ? यदि आप मेरा हित देखते और सोचते हैं, तो कृपया मेरे हित के लिए मुझे उपदेश दीजिए।" | mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
कथं जयेयं संग्रामे भवन्तमपराजितम्।
एतन्मे मन्त्रय हितं यदि श्रेय: प्रपश्यसि॥ ४५॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "पितामह! आप तो किसी से पराजित होने वाले नहीं हैं, फिर मैं आपको युद्ध में कैसे हरा सकता हूँ? यदि आप मेरा हित देखते और सोचते हैं, तो कृपया मेरे हित के लिए मुझे उपदेश दीजिए।"
Yudhishthira said, "Grandfather! You are not going to be defeated by anyone, then how can I defeat you in battle? If you see and think about my welfare, then please give me advice for my benefit." 45.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥