श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.43.44 
भीष्म उवाच
राजन् किमत्र साह्यं ते करोमि कुरुनन्दन।
कामं योत्स्ये परस्यार्थे ब्रूहि यत् ते विवक्षितम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - हे राजन! कुरुपुत्र! मैं यहाँ आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ? मैं आपकी इच्छानुसार आपके शत्रु पक्ष की ओर से युद्ध करूँगा; अतः आप क्या कहना चाहते हैं, यह बताइए॥ 44॥
 
Bhishma said - O King! Son of Kuru! How can I help you here? I will fight on the side of your enemy as per your wish; so tell me, what do you want to say?॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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