श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  6.43.4-5h 
षट्शतानि सविंशानि श्लोकानां प्राह केशव:।
अर्जुन: सप्तपञ्चाशत् सप्तषष्टिं तु संजय:॥ ४॥
धृतराष्ट्र: श्लोकमेकं गीताया मानमुच्यते।
 
 
अनुवाद
इस गीता में 620 श्लोक भगवान कृष्ण ने कहे हैं, 57 श्लोक अर्जुन ने कहे हैं, 66 श्लोक संजय ने कहे हैं और एक श्लोक धृतराष्ट्र ने कहा है। यही गीता का मान कहा गया है।
 
In this Gita, 620 verses have been said by Lord Krishna, 57 verses have been said by Arjun, 66 verses have been said by Sanjaya and one verse has been said by Dhritarashtra. This is said to be the value of the Gita. 4 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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