श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.43.38 
भीष्म उवाच
यद्येवं नाभिगच्छेथा युधि मां पृथिवीपते।
शपेयं त्वां महाराज पराभावाय भारत॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, 'हे पृथ्वी के स्वामी! भरतपुत्र! महाराज! यदि आप इस युद्ध के समय इस प्रकार मेरे पास न आते, तो मैं आपको पराजित होने का शाप दे देता।' 38
 
Bhishma said, 'O lord of the earth! Son of the Bharat clan! Maharaj! If you had not come to me like this during this war, I would have cursed you to be defeated.' 38
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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