श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.43.37 
युधिष्ठिर उवाच
आमन्त्रये त्वां दुर्धर्ष त्वया योत्स्यामहे सह।
अनुजानीहि मां तात आशिषश्च प्रयोजय॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे वीर पितामह! मैं आपकी अनुमति चाहता हूँ, मैं आपसे युद्ध करना चाहता हूँ। पितामह! कृपया इसके लिए मुझे अपनी अनुमति और आशीर्वाद प्रदान करें।
 
Yudhishthira said - O brave grandfather! I want your permission, I want to fight with you. Father! Please give me your permission and blessings for this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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