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mahabharat 6.43.36: वहाँ जाकर पाण्डुनन्दन राजा युधिष्ठिर ने अपने दोनों हाथों से पितामह के चरण दबाये और युद्ध के लिए उपस्थित शान्तनुनन्दन भीष्म से इस प्रकार कहा॥36॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.43.36 
तमुवाच तत: पादौ कराभ्यां पीडॺ पाण्डव:।
भीष्मं शान्तनवं राजा युद्धाय समुपस्थितम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ जाकर पाण्डुनन्दन राजा युधिष्ठिर ने अपने दोनों हाथों से पितामह के चरण दबाये और युद्ध के लिए उपस्थित शान्तनुनन्दन भीष्म से इस प्रकार कहा॥36॥
 
Going there, that Pandanunandan king Yudhishthir pressed the feet of his grandfather with both his hands and said thus to that Shantanunandan Bhishma who was present for the war. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)