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mahabharat 6.43.35: बाणों और शस्त्रों से लदे हुए शत्रु सेना में प्रवेश करके, अपने भाइयों से घिरे हुए युधिष्ठिर तुरन्त ही भीष्म के पास पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.43.35 
सोऽवगाह्य चमूं शत्रो: शरशक्तिसमाकुलाम्।
भीष्ममेवाभ्ययात् तूर्णं भ्रातृभि: परिवारित:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
बाणों और शस्त्रों से लदे हुए शत्रु सेना में प्रवेश करके, अपने भाइयों से घिरे हुए युधिष्ठिर तुरन्त ही भीष्म के पास पहुँचे।
 
Having entered the enemy's army laden with arrows and weapons, Yudhishthira, surrounded by his brothers, immediately reached Bhishma. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)