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mahabharat 6.43.32: राजन! युधिष्ठिर को इस प्रकार डाँटकर सारी कौरव सेना तुरन्त ही पुनः शान्त हो गई।   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.43.32 
ततस्तत् कौरवं सैन्यं धिक्कृत्वा तु युधिष्ठिरम्।
नि:शब्दमभवत् तूर्णं पुनरेव विशाम्पते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
राजन! युधिष्ठिर को इस प्रकार डाँटकर सारी कौरव सेना तुरन्त ही पुनः शान्त हो गई।
 
King! Having thus rebuked Yudhishthira the entire Kaurava army soon became silent again. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)