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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.43.31 
व्यनिन्दश्च तथा सर्वे योधास्तव विशाम्पते।
युधिष्ठिरं ससोदर्यं सहितं केशवेन हि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! आपके वे सभी योद्धा भाई और विशेषतः श्रीकृष्ण युधिष्ठिर की निन्दा करते थे॥31॥
 
Prajanath! All those warrior brothers of yours and Shri Krishna especially used to criticize Yudhishthira. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)