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mahabharat 6.43.30: तत्पश्चात् वे सब सैनिक कौरवोंकी स्तुति करने लगे और हर्ष और प्रसन्नतासे अपने वस्त्र लहराने लगे ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.43.30 
ततस्ते सैनिका: सर्वे प्रशंसन्ति स्म कौरवान्।
हृष्टा: सुमनसो भूत्वा चैलानि दुधुवुश्च ह॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे सब सैनिक कौरवोंकी स्तुति करने लगे और हर्ष और प्रसन्नतासे अपने वस्त्र लहराने लगे ॥30॥
 
Thereafter all those soldiers began praising the Kauravas and began waving their clothes in joy and happiness. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)