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mahabharat 6.43.3: गीता, गंगा, गायत्री और गोविन्द इन चार नामों को हृदय में धारण करने से मनुष्य इस संसार में दोबारा जन्म नहीं लेता। 3॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.43.3 
गीता गंगा च गायत्री गोविन्देति हृदि स्थिते।
चतुर्गकारसंयुक्ते पुनर्जन्म न विद्यते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
गीता, गंगा, गायत्री और गोविन्द इन चार नामों को हृदय में धारण करने से मनुष्य इस संसार में दोबारा जन्म नहीं लेता। 3॥
 
By keeping in the heart these four names – Geeta, Ganga, Gayatri and Govind – a person is not born again in this world. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)