श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.43.28 
धनंजये कथं नाथे पाण्डवे च वृकोदरे।
नकुले सहदेवे च भीतिरभ्येति पाण्डवम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पांडवपुत्र धनंजय, वृकोदर भीम और नकुल तथा सहदेव जैसे सहायकों के रहते हुए युधिष्ठिर के मन में भय कैसे उत्पन्न हो सकता है?' 28॥
 
‘How could fear arise in Yudhishthira's mind when he had helpers like Pandava's son Dhananjaya, Vrikodar Bhima and Nakula and Sahadeva?॥ 28॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd