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mahabharat 6.43.26: दूर से युधिष्ठिर को देखकर दुर्योधन के सैनिक आपस में इस प्रकार बातें करने लगे - ‘यह युधिष्ठिर अपने कुल के लिए जीवित कलंक है ॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.43.26 
दृष्ट्वा युधिष्ठिरं दूराद् धार्तराष्ट्रस्य सैनिका:।
मिथ: संकथयाञ्चक्रुरेषो हि कुलपांसन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
दूर से युधिष्ठिर को देखकर दुर्योधन के सैनिक आपस में इस प्रकार बातें करने लगे - ‘यह युधिष्ठिर अपने कुल के लिए जीवित कलंक है ॥ 26॥
 
On seeing Yudhishthira from a distance, Duryodhana's soldiers began talking among themselves like this - 'This Yudhishthira is a living disgrace to his clan.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)