श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.43.24 
अनुमान्य यथाशास्त्रं यस्तु युध्येन्महत्तरै:।
ध्रुवस्तस्य जयो युद्धे भवेदिति मतिर्मम॥ २४॥
 
 
अनुवाद
मेरा विश्वास है कि जो मनुष्य शास्त्रविधि के अनुसार माननीय लोगों से अनुमति लेकर युद्ध करता है, उस युद्ध में उसकी विजय अवश्य होती है।॥24॥
 
I believe that one who fights a war according to the injunctions of the scriptures after taking permission from honourable people is sure to be victorious in that war.'॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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