श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.43.22 
एष भीष्मं तथा द्रोणं गौतमं शल्यमेव च।
अनुमान्य गुरून् सर्वान् योत्स्यते पार्थिवोऽरिभि:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘यह राजा युधिष्ठिर अपने सभी अग्रजों - भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य और शल्य - से अनुमति लेकर शत्रुओं से युद्ध करेंगे।॥ 22॥
 
‘This King Yudhishthira will take permission from all his elders – Bhishma, Dronacharya, Krupacharya and Shalya – and will fight the enemies.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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