श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.43.21 
तानुवाच महाप्राज्ञो वासुदेवो महामना:।
अभिप्रायोऽस्य विज्ञातो मयेति प्रहसन्निव॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब परम बुद्धिमान् एवं महाबुद्धि भगवान् वासुदेव ने हँसते हुए चारों भाइयों से कहा, 'मैं उनका अभिप्राय समझ गया हूँ।'
 
Then the supremely intelligent and great-minded Lord Vasudeva smilingly told the four brothers, 'I have understood their intention.' 21.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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