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mahabharat 6.43.17: भीमसेन ने पूछा - महाराज! पृथ्वीनाथ! कवच आदि से सुसज्जित होकर शत्रु सेना में अपने भाइयों को छोड़कर तथा कवच और अस्त्र-शस्त्र फेंककर आप कहाँ जाएँगे?॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.43.17 
भीमसेन उवाच
क्व गमिष्यसि राजेन्द्र निक्षिप्तकवचायुध:।
दंशितेष्वरिसैन्येषु भ्रातॄनुत्सृज्य पार्थिव॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन ने पूछा - महाराज! पृथ्वीनाथ! कवच आदि से सुसज्जित होकर शत्रु सेना में अपने भाइयों को छोड़कर तथा कवच और अस्त्र-शस्त्र फेंककर आप कहाँ जाएँगे?॥ 17॥
 
Bhimasena asked - Maharaj! Prithvinath! Where will you go among the enemy army equipped with armour etc., leaving behind your brothers and throwing down your armour and weapons?॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)