श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  6.43.14-15 
तं प्रयान्तमभिप्रेक्ष्य कुन्तीपुत्रो धनंजय:।
अवतीर्य रथात् तूर्णं भ्रातृभि: सहितोऽन्वयात्॥ १४॥
वासुदेवश्च भगवान‍् पृष्ठतोऽनुजगाम तम्।
तथा मुख्याश्च राजानस्तच्चित्ता जग्मुरुत्सुका:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जब कुन्तीपुत्र धनंजय ने उन्हें शत्रु सेना की ओर जाते देखा, तब वे तुरन्त ही रथ से उतरकर अपने भाइयों सहित उनके पीछे चल पड़े। भगवान श्रीकृष्ण भी उनके पीछे-पीछे चल पड़े और उनमें मग्न रहने वाले प्रमुख राजा भी उत्सुकतापूर्वक उनके साथ चल पड़े॥ 14-15॥
 
When Kunti's son Dhananjaya saw them going towards the enemy army, he immediately got down from his chariot and started following them along with his brothers. Lord Krishna also followed them and the prominent kings, who were engrossed in Him, also eagerly went with them.॥ 14-15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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