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श्लोक 6.43.109  |
ततो जघ्नुर्महाभेरी: शतशश्च सहस्रश:।
शङ्खांश्च गोक्षीरनिभान् दध्मुर्हृष्टा मनस्विन:॥ १०९॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् समस्त बुद्धिमान पुरुष हर्ष में भरकर सैकड़ों-हजारों बड़े-बड़े सींग और शंख बजाने लगे, जो गाय के दूध के समान श्वेत थे॥109॥ |
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| Thereafter all the wise men filled with joy blew hundreds and thousands of large horns and conches that were as white as cow's milk.॥109॥ |
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इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भीष्मादिसम्मानने त्रिचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें भीष्म आदिका समादरविषयक तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४३॥
[दाक्षिणात्य अधिक पाठके तीन श्लोक मिलाकर कुल ११२ श्लोक हैं।] |
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