vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना
»
श्लोक 108
श्लोक
6.43.108
म्लेच्छाश्चार्याश्च ये तत्र ददृशु: शुश्रुवुस्तथा।
वृत्तं तत् पाण्डुपुत्राणां रुरुदुस्ते सगद्गदा:॥ १०८॥
अनुवाद
वहाँ पाण्डवों का यह व्यवहार देखकर और सुनकर सभी म्लेच्छ और आर्य रुँधे हुए गले से रोने लगे।
All the mlechha and aryas who saw and heard about the behaviour of the Pandavas there began to cry with choked throats.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd