श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  6.43.106 
सौहृदं च कृपां चैव प्राप्तकालं महात्मनाम्।
दयां च ज्ञातिषु परां कथयाञ्चक्रिरे नृपा:॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
महात्मा पाण्डवों की सौहार्दता, दयालुता, समय पर कर्तव्य पालन तथा अपने परिवारजनों के प्रति अत्यंत दयालुता की चर्चा सब राजा करने लगे ॥106॥
 
All the kings started talking about Mahatma Pandavas' cordiality, kindness, performance of duty at the right time and utmost kindness towards their family members. 106॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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