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mahabharat 6.43.105: माननीय पुरुषों का आदर करने वाले पाण्डवों का अभिमान देखकर सब राजा उनकी बड़ी प्रशंसा करने लगे ॥105॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  6.43.105 
गौरवं पाण्डुपुत्राणां मान्यान् मानयतां च तान्।
दृष्ट्वा महीक्षितस्तत्र पूजयाञ्चक्रिरे भृशम्॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
माननीय पुरुषों का आदर करने वाले पाण्डवों का अभिमान देखकर सब राजा उनकी बड़ी प्रशंसा करने लगे ॥105॥
 
Beholding the pride of the Pandavas who respected honourable men, all the kings began to praise them greatly. ॥105॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)