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mahabharat 6.43.104: पाण्डवों को पुनः रथों पर बैठे देखकर धृष्टद्युम्न आदि राजा अत्यन्त प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  6.43.104 
रथस्थान् पुरुषव्याघ्रान् पाण्डवान् प्रेक्ष्य पार्थिवा:।
धृष्टद्युम्नादय: सर्वे पुनर्जहृषिरे तदा॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों को पुनः रथों पर बैठे देखकर धृष्टद्युम्न आदि राजा अत्यन्त प्रसन्न हुए।
 
Seeing the Pandavas seated on their chariots again, kings like Dhrishtadyumna became very happy. 104.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)