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mahabharat 6.43.103: उन महापुरुषों ने सैकड़ों बाँसुरी और नगाड़े बजाए और अनेक प्रकार से सिंहनाद किया ॥103॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  6.43.103 
अवादयन् दुन्दुभींश्च शतशश्चैव पुष्करान्।
सिंहनादांश्च विविधान् विनेदु: पुरुषर्षभा:॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
उन महापुरुषों ने सैकड़ों बाँसुरी और नगाड़े बजाए और अनेक प्रकार से सिंहनाद किया ॥103॥
 
Those great men played hundreds of flutes and drums and made lion roars in many ways. 103॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)