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mahabharat 6.43.102: तत्पश्चात् वे सभी महापुरुष अपने रथों पर सवार हुए; तत्पश्चात् उन्होंने पुनः शत्रुओं का सामना करने के लिए पहले के समान ही अपनी सेना की व्यूह रचना की ॥102॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  6.43.102 
प्रत्यपद्यन्त ते सर्वे स्वरथान् पुरुषर्षभा:।
ततो व्यूहं यथापूर्वं प्रत्यव्यूहन्त ते पुन:॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे सभी महापुरुष अपने रथों पर सवार हुए; तत्पश्चात् उन्होंने पुनः शत्रुओं का सामना करने के लिए पहले के समान ही अपनी सेना की व्यूह रचना की ॥102॥
 
Then all those great men mounted their chariots; after this they once again formed the battle formation of their army in the same manner as before to face the enemy.॥ 102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)