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mahabharat 6.43.101: तत्पश्चात् भाइयोंसहित राजा युधिष्ठिर ने अत्यन्त प्रसन्न होकर सुवर्ण के बने हुए चमकते हुए कवच धारण किए ॥101॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  6.43.101 
ततो युधिष्ठिरो राजा सम्प्रहृष्ट: सहानुज:।
जग्राह कवचं भूयो दीप्तिमत् कनकोज्ज्वलम्॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भाइयोंसहित राजा युधिष्ठिर ने अत्यन्त प्रसन्न होकर सुवर्ण के बने हुए चमकते हुए कवच धारण किए ॥101॥
 
Thereafter, King Yudhishthir along with his brothers became very happy and wore shining armor made of gold. 101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)