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mahabharat 6.42.78: जहाँ योगेश्वर कृष्ण हैं और जहाँ श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन हैं, वहाँ निश्चित रूप से समृद्धि, विजय, अलौकिक शक्ति और नीति है। ऐसा मेरा मत है।   |   mahabharat अध्याय 6.42: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 18: संन्यास योग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 42: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 18: संन्यास योग  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  6.42.78 
यत्र योगेश्वर: कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धर: ।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ॥ ७८ ॥
 
 
अनुवाद
जहाँ योगेश्वर कृष्ण हैं और जहाँ श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन हैं, वहाँ निश्चित रूप से समृद्धि, विजय, अलौकिक शक्ति और नीति है। ऐसा मेरा मत है।
 
Wherever there is Yogeshwar Krishna and where there is the best archer Arjun, there is definitely prosperity, victory, supernatural power and policy. This is my opinion.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे मोक्षसंन्यासयोगो नामाष्टादशोऽध्याय:॥ १८॥ भीष्मपर्वणि तु द्विचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वके अन्तर्गत ब्रह्मविद्या एवं योगशास्त्ररूप श्रीमद्भगवद्‍गीतोपनिषद्, श्रीकृष्णार्जुन-संवादमें मोक्षसंन्यासयोग नामक अठारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८॥ भीष्मपर्वमें बयालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)