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mahabharat 6.42.76: हे राजन, जब मैं कृष्ण और अर्जुन के बीच हुए इस अद्भुत और पवित्र संवाद को बार-बार स्मरण करता हूँ, तो मैं हर क्षण आनंद से भर जाता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 6.42: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 18: संन्यास योग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 42: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 18: संन्यास योग  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  6.42.76 
राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम् ।
केशवार्जुनयो: पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहु: ॥ ७६ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन, जब मैं कृष्ण और अर्जुन के बीच हुए इस अद्भुत और पवित्र संवाद को बार-बार स्मरण करता हूँ, तो मैं हर क्षण आनंद से भर जाता हूँ।
 
O King, when I repeatedly recall this wonderful and sacred conversation between Krishna and Arjuna, I become filled with joy every moment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)