Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.42.71: जो मनुष्य भक्तिपूर्वक तथा द्वेषरहित होकर इसे सुनता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है और उन शुभ लोकों को प्राप्त करता है, जहाँ पुण्यात्माएँ निवास करती हैं। | mahabharat अध्याय 6.42: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18: संन्यास योग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रद्धावाननसूयश्च शृणुयादपि यो नर: ।
सोऽपि मुक्त: शुभाँल्लोकान्प्राप्नुयात्पुण्यकर्मणाम् ॥ ७१ ॥
अनुवाद
जो मनुष्य भक्तिपूर्वक तथा द्वेषरहित होकर इसे सुनता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है और उन शुभ लोकों को प्राप्त करता है, जहाँ पुण्यात्माएँ निवास करती हैं।
And he who listens to it with devotion and without malice becomes free from all sins and attains those auspicious regions where the virtuous souls reside.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥