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mahabharat 6.42.7: मनुष्य को कभी भी नियत कर्मों का त्याग नहीं करना चाहिए। यदि कोई आसक्ति के कारण अपने नियत कर्मों का त्याग कर देता है, तो ऐसे त्याग को तामसी कहा जाता है।   |   mahabharat अध्याय 6.42: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 18: संन्यास योग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.42.7 
नियतस्य तु सन्न्यास: कर्मणो नोपपद्यते ।
मोहात्तस्य परित्यागस्तामस: परिकीर्तित: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को कभी भी नियत कर्मों का त्याग नहीं करना चाहिए। यदि कोई आसक्ति के कारण अपने नियत कर्मों का त्याग कर देता है, तो ऐसे त्याग को तामसी कहा जाता है।
 
One should never abandon the prescribed duties. If someone abandons his prescribed duties due to attachment, such renunciation is called Tamasi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)