Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.42.67: यह गुप्त ज्ञान उन लोगों के समक्ष कभी प्रकट नहीं किया जाना चाहिए जो न तो आत्मसंयमी हैं, न ही श्रद्धालु हैं, न ही भक्ति में तत्पर हैं, और न ही उन लोगों के समक्ष जो मुझसे द्वेष रखते हैं। | mahabharat अध्याय 6.42: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18: संन्यास योग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन ।
न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति ॥ ६७ ॥
अनुवाद
यह गुप्त ज्ञान उन लोगों के समक्ष कभी प्रकट नहीं किया जाना चाहिए जो न तो आत्मसंयमी हैं, न ही श्रद्धालु हैं, न ही भक्ति में तत्पर हैं, और न ही उन लोगों के समक्ष जो मुझसे द्वेष रखते हैं।
This secret knowledge should never be revealed to those who are neither self-controlled, nor devoted, nor devoted to devotion, nor to those who hate me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥